Friday, February 3, 2017

पंजाब का घमासान

पंजाब से खबरीलाल की रिपोर्ट :


पंजाब में चुनाव हैं और इसी बीच राहुल गाँधी ने तहलका मचाते हुए चुनावी घमासान में अपनी एक चाल से सारे विरोधियों को जबरदस्त झटका दे दिया है.

आज सुबह सुबह 11 बजे राहुल गाँधी ने एलान कर दिया कि पंजाब चुनाव जीतने पर कांग्रेस पार्टी हल्दीराम भुजिया नमकीन को सारे पंजाब वासियों में मुफ्त बांटेगी. हालाँकि प्रत्येक परिवार को हर दिन 10 रूपये
वाला 1 पैकेट दिया जायेगा. राहुल गाँधी ने बताया है कि कांग्रेस के इस प्रयास से किसानों को आलू उत्पादन और आमदनी में मुनाफा होगा और साथ ही युवाओं को चकना कम पड़ने की समस्या से छुटकारा भी मिल जायेगा. इस घोषणा की हर तरफ जबरदस्त प्रसंशा हो रही है और पंजाब का युवा वर्ग बहुत उत्साहित है. कांग्रेस युवा कमेटी नए नारे के साथ मैदान में उतर आयी है .

"जन जन की है यही पुकार
चकना देगी कांग्रेस सरकार"

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घोषणा के बाद कांग्रेस कार्यकर्त्ता 


सकते में आये विरोधियो में से एक आम आदमी पार्टी के एकमात्र बहुचर्चित नेता अरविन्द केजरीवाल ने इस कदम को हमेशा की तरह 'असंवैधानिक' बता डाला है. आम आदमी पार्टी ने भी चुनाव जीतने पे हर गली में  निम्बू सोडा के फ्री स्टोल लगाने का वायदा कर दिया है. केजरीवाल ने कहा कि भले ही पंजाब में नशे के हालात न सुधरें लेकिन नशेड़ियों की हालत में सुधार आना चाहिए. बरखा दत्त ने भी इस फैसले का स्वागत करते हुए इसे हैंगओवर को चुनौती देने वाला ऐतिहासिक कदम बताया है.

" पांच साल केजरीवाल , निम्बू सोडा तेरे नाल "  का नारा भी जोर पकड़ने लगा है.


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1 पेग पे मिलने वाले निम्बू सोडा की मात्रा बताते केजरीवाल 


अफरातफरी में अकाली दल ने भी दवाई डिस्प्रिन को फ्री करने का वादा  किया है और हर जेब में एक डिस्प्रिन अनिवार्य रूप से रखने का कानून बनाने में जोर दिया है . बादल बंधुओं का कहना है कि इस फैसले से फार्मा इंडस्ट्री में उछाल आएगा और साथ ही हैंगओवर से होने वाले सर दर्द से राहत भी मिलेगी.  सरकार नशे की हर समस्या से लड़ने के लिए पूरी तरह से कटिबद्ध है.



अमित शाह ने भी बीजेपी की ओर से  नशे की समस्या दूर करने के लिए रजनीगंधा के साथ तुलसी फ्री देने का वादा किया है और जोर देकर कहा है कि इससे युवाओं में नए तरीके के शौक पैदा कर के बाकि समस्याओं से छुटकारा पाया जा सकता है.

नारा है ,
"अबकी बार , रजनीगंधा मेरे यार"

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मिश्रा जी की दुकान के बाहर कार्यकर्ताओं की भीड़



शानदार माहौल है और जनता एक मिली जुली सरकार की आस लगाए बैठी है.
अखिल भारतीय बेवड़ा संघ ने सारी घोषणाओं का स्वागत किया है.

बाकी समाचार चुनावी नतीजो के बाद.


-रोहित जोशी
कार्यकर्ता

Thursday, December 17, 2015

प्रभु केजरीवाल का महाभारत अवतार



यह घटना उस समय की है जब "कलियुग" समाप्ति के बाद द्वापर युग का आरम्भ हुआ. महाभारत अत्यंत रोचक दौर से गुजर रहा था. सेनाएं कौरवों और पांडवों में बँट रही थी और पांडवों ने भगवान श्री कृष्ण को अपने खेमे में लेके आधा मैदान जीत लिया था. दुर्योधन के पास भगवान श्री कृष्ण की सेना थी और वो "बाबा जी की बूटी" वाले गाने को सीरियसली लेते हुए बूटी पिए हुए मस्त था. लेकिन शकुनि मामा ने सही समय पर दुर्योधन के आँखों में जमी हुई 'गुडगाँव की धूल 'साफ़ करी ,बूटी फेंकी और बोले " हे दुर्योधन प्रदुषण बढ़ गया है. गुडगाँव की धूल ने तुम्हारी आँखें बंद कर दी हैं  और लड़कियों ने तुम्हारी साँसे बंद कर दी हैं .गार्नियर मैन फेसवॉश से चेहरा धो के आओ और फिर युद्ध की रणनीति बनाते हैं."


दुर्योधन नें तुरंत एक "पत्निव्रता पति" की तरह आज्ञा का पालन किया और फेयर एंड हैंडसम होकर मामा के पास पहुँच गया. शकुनि मामा इंटरनेट के बहुत बड़े ज्ञानी थे और उन्हें प्रोक्सी सर्वर की 100 से भी ज्यादा साइट्स मुँह जबानी याद थी. उन्होंने द्वापर युग के भगवान श्री कृष्ण को मात देने के लिए कलियुग के युगपुरुष केजरीवाल जी सहायता लेने का मन बना लिया.

शकुनि मामा युगपुरुष को धरती पर लाने के उपाय गूगल में ढूंढने लगे. दुर्योधन ने जैसे ही युगपुरुष केजरीवाल जी के कारनामो के बारे में सुना उसने एक बार अपनी ही जगह पे घूम के "यू टर्न" लेके युगपुरुष को 'सहारा प्रणाम' किया और "आम आदमी ज़िंदाबाद" के पूरे तीन नारे लगाये.

गूगल के पहले 3 पेजों की सारी वेबसाइट छान मारी लेकिन भगवान केजरीवाल के जितने रूप उतने ही उनके धरती पर आने के उपाय. शकुनि मामा तो एकदम कन्फुजिया गए और दुर्योधन ने मन को शांत करने के लिए प्रभु केजरीवाल का ध्यान कर के "यही तो स्कैम है जी" का तीन बार अंतर्मन से उच्चारण किया.

अंत में दुःशासन की मदद ली गयी जो की वेब सर्फिंग का एक माहिर खिलाडी माना जाता था, लेकिन प्रभु केजरीवाल की लीला तो वो ही जानें. यकीन मानिये दुःशासन ने भी हार मान के टॉप 3 वेबसाइट में "आदा पादा" वाले मन्त्र से एक बेस्ट वेबसाइट का चुनाव किया. समस्या दूर हुई और उपाय सामने थे.

प्रभु केजरीवाल का वाहन - आम गिरगिट

पहला उपाय - प्रभु केजरी के वाहन 'गिरगिट' के साथ लाल,पीने, नीले और हरे रंग में सेल्फ़ी
दूसरा उपाय - 1000 लोगों पे अलग अलग तरीके के आरोप लगा के भागना
तीसरा उपाय - प्रभु केजरीवाल के गाये गए ऑस्कर विनिंग भजन " इंसान का इंसान से हो भाईचारा" को बिना रुके हैडफ़ोन पे 10 बार सुनना.

दुर्योधन "कॉर्पोरेट टाइप" आदमी निकला. उसने दूसरा उपाय चुना ताकि लोगो से नेटवर्किंग हो जाये जो आगे चल के काम आये और काम ना आये तो बस कहने को हो कि 1000 लोगों को जानता है.


खैर , 1000 में से 300 लोगों से मार खाने के बाद आखिरकार तपस्या पूरी हुई और XXL साइज का स्वेटर , बिना बेल्ट के एक ढीली से पेंट , काला मफलर और सैंडल धारण किये हुए एक बहुत ज्यादा आम सा दिखने वाला आदमी गिरगिट के ऊपर बैठ कर धरती पर अवतरित हुआ. सारी रणभूमि "आम आदमी ज़िंदाबाद" , "5 साल केजरीवाल" और "यही तो स्कैम है जी"  के नारों से गूंज उठी. अरे यही तो प्रभु केजरीवाल थे! संजय जो धृतराष्ट्र को महाभारत का आँखों देखा हाल बता रहे थे , आम आदमी के भगवान की ऐसी दयनीय हालत देख के उनकी आँखें भर आई और वो भी "5 साल केजरीवाल" का नारा लगाने से खुद को रोक नहीं पाये.


आम आदमी के रूप में प्रकट होते प्रभु केजरीवाल



प्रभु केजरीवाल ने दुर्योधन को "ईमानदारी का सर्टिफिकेट" देते हुए कहा " हे दुर्योधन ! हमने तुम्हारी जांच अपने "लोकपाल" से ही करवा ली है तुम लालू जी से भी ज्यादा ईमानदार हो और आज से हम तुम्हारे साथ हैं!" ये आम आदमी की लड़ाई है. हम और तुम कौन हैं जी .. आम आदमी ही तो हैं.  और इस तरह से प्रभु केजरीवाल ने "आम ज्ञान" देके सबको धन्य किया.

 शकुनि मामा ने चालाकी दिखाते हुए प्रभु केजरीवाल से लड़ाई की "जनरल टर्म्स एंड कंडीशन" के तहत 420 रुपए के बांड "नो यू टर्न" पर दस्तखत ले लिए. लेकिन प्रभु केजरीवाल के आरोपों से कौन भाग पाया है ? प्रभु ने 370 पेजों वाली शीला दीक्षित वाली रिपोर्ट का हवाला देते हुए बांड पेपर को नकली बताया और टर्म्स एंड कंडीशंस कहीं भी "संविधान" में नहीं लिखा है कह कर पेपर जला दिया. प्रभु के इस अद्भुत चमत्कार को देख के शकुनि मामा और दुर्योधन ने अपने आप को प्रभु के चरणों में समर्पित कर दिया और उनके "आंतरिक लोकपाल" में शामिल होने की इच्छा जताई. प्रभु ने "खांस" कर मना कर दिया.

टर्म्स एंड कंडीशंस के पेपर जलाते प्रभु केजरीवाल



तभी ये क्या ? प्रभु ने देखा कि आधी सेना तो उनके कंट्रोल में ही नहीं है और वो पांडवों की तरफ से लड़ रही है .बस फिर क्या था प्रभु पूर्ण स्वराज के साथ पूरी सेना की मांग लेके धरने पे बैठ गए. प्रभु का धरना एक योगी की तपस्या से भी लम्बा होता है. सब धरने के खत्म होने के इन्तेजार में थे.............

प्रभु के धरने में बैठते ही धरती हिलने लगी , भूचाल सा आ गया ... तभी चेहरे पे चटाक एक तमाचा पड़ा और मम्मी
चिल्लाई - उठ जा अब नहीं तो बिस्तर समेत बाहर फेंकती हूँ.

दर्द हुआ लेकिन बड़ा सुकून मिला कि अभी कलयुग चल रहा है और द्वापर तो पहले ही समाप्त हो गया है जिसमे पांडव ही जीते थे और भगवान श्री कृष्ण ने ही गीता ज्ञान दिया था.
तभी पता नहीं किसने कान में चुपके से कहा " यही तो स्कॅम था जी " ;)


  - रोहित जोशी उदास "आम अादमी"


Monday, January 19, 2015

अधूरी कहानी

 आज पुरानी यादों से कुछ गुफ्तगू करने का वक़्त मिल गया वरना तेरी याद आते ही ये दिल शराब की बातें करने लगता है और दिमाग तेरी! और जब दिल दिमाग दोनों मिल जाएं तो वह मेरी रोज की शाम बन जाती है! अब शिकायत मत करना कि मैं रोज शराब क्यों पीता हूँ !
खैर आज यादों से फुर्सत मिली ही थी कि कुछ ख्यालों ने दिमाग पे बड़ी जोर से दस्तक दे दी। और कुछ झूठी बातो के सामने आयना रख दिया।

मेरी दुनिया छोटी थी, मध्यम वर्गीय वाले सपने और वैसे ही उम्मीदें! वक़्त सीमित ही रहता है तो साथ में कुछ अपने से मेल खाने वाले सपने भी बुन लिए ! इसी बीच समझ आया की तुम्हारे सपने मेरी हक़ीक़त से बड़े थे! इतने बड़े कि मन एक कदम एक पल के लिए रुक गए और एक तरफ़ा समझौते! प्यार में समझौते प्यार प्यार में हो जाते हैं लेकिन शायद इनकी भी कुछ सीमाएं होती हैं! ये सीमाएं प्यार करने से पहले नहीं खींची जाती और बाद में खींचना बहुत मुश्किल!

खैर दोनों आगे बढे एक ही मंजिल की तरफ लेकिन शायद धीरे धीरे रास्ते अलग हो रहे थे । मैंने कच्चे रास्ते चुने और उसने पक्की सड़क। मुझे अपने जाने पहचाने रास्तों पे भरोसा था तो उसे पक्की सड़कों की रफ़्तार पर । अब दोनों रास्तों की मंजिलें भी अलग हो गयी थी और दोनों मुसाफिरों की रफ़्तार भी। 

शायद कभी यह कच्चा रास्ता उस पक्की सड़क से जा मिले। पर यह ना मिले तो बेहतर है क्योंकि जब कच्चे रास्ते पक्की सड़कों से मिलते हैं तो ये रास्ते वहीं पे ख़त्म हो जाते हैं। और उनका सफ़र भी। कच्चे रास्तों से अब प्यार सा हो गया है जब कभी ठोकर लगती है और गिरना होता है तो दर्द कम ही होता है वर्ना पक्की सड़कों पे खतरा ज्यादा है। हमें अपने रास्ते मुबारक तुम्हें सड़क।

कहानी अधूरी रही लेकिन पूरी रही ।




Monday, November 10, 2014

"मोदी" - समझने के लिए सीमाएं जरुरी

नरेंद्र मोदी , एक ऐसा नाम जिसे समझने में बहुत से लोगो ने बहुत जल्दी करी और उस समझ को अपने पास रख लिया, कुछ ने दूर से समझा,कुछ ने समझने के बाद उसे नासमझने का भरपूर प्रयास किया और कुछ ने समझने का प्रयास ही नहीं किया!

एक प्रयास किया है नरेंद्र मोदी या कहें किसी को भी परखने के लिए "समझ की सीमाएं" खींचने का! बादलों , समंदर और पर्वतों के द्वारा ! 

नारंगी बादलों की टोली देखी! 
काला,सफ़ेद,भूरा बादल आज नारंगी रंग में मदमस्त झूम रहा है! 
शायद परेशान है शायद खुश!
किसे पता? 
सिर्फ चेहरा ही, पहचान नहीं होता !

समंदर की लहरें,आज कुछ ज्यादा गुस्से में थी,
वापसी में कुछ मोती छोड़ के गयी थी!
शायद नाराज़ थी शायद प्यार में,
किसे पता?
कुछ पल का हिसाब ही , अंजाम नहीं होता!

दूर से नज़र पहाड़ पे पड़ी,कठोर विशाल, भयानक!

लेकिन मिट्टी,पेड़, झरना और फूल सब कुछ समेटे हुए
शायद बाहर से कठोर ,शायद अंदर से मुलायम?

किसे पता?
पत्थर हमेशा कठोरता का प्रमाण नहीं होता !


सिर्फ चेहरा ही, पहचान नहीं होता !



कभी देखने में दिक्कत हो तो जरुरी नहीं कि नज़र ही ख़राब हो , आईने में धूल भी जमी हो सकती है!

- रोहित जोशी





Wednesday, November 5, 2014

स्वच्छ भारत मिशन - सपना या हकीक़त !

स्वच्छ भारत मिशन शुरू हुए बहुत दिन हुए, बहुत कम समय लगा इस मिशन को समझने में लेकिन बहुत ज्यादा समय लगेगा इस मिशन को हकीकत बनते देखने में! मिशन शुरू हुआ और सब में कुछ अजीब सा अटपटा सा सन्देश देता हुआ आगे बढ़ा कि भाई अब सफाई भी कर लो! आपके लिए ही कह रहे हैं!
जब कुछ लोगो को टीवी पे देखा तो ख्याल आया -
भाई गज़ब हुआ
चमत्कार हो गया
आज साल में दूसरी बार लोगो को
देश से प्यार हो गया!
( साल का एकमात्र प्यार बस 15 अगस्त को आता है और 16 अगस्त को चला जाता है!)

इसी बीच एक पढ़ी लिखी प्रजाति का मानुस से मैंने पूछा तो बोलता है कि
भाई अब सब कुछ साफ़ साफ़ रखुंगा
कसम देश की है
सफाई के पल पल का हिसाब रखुंगा!

मज़ा सा आ गया ऐसी बातें सुन के लेकिन तभी उसने डकार लेते हुए खाली lays का पैकेट का पत्थर बनाते हुए कूड़ेदान पे निशाना लगाया और अंडर हैंड थ्रो कर दिया ! निशाना लगाया तो जोंटी रोड्स समझ के लेकिन निशाना सरकारी योजनाओं की तरह सही दिशा से कोसो दूर मंजिल को बस दूर से देख के निकल गया!
अब वो lays का पैकेट उसे दूर से निहार रहा था , अपनी मजिल से दूर .और उसने ohh Shit!  कहते हुआ नजर बचायी और आगे बढ़ गया ! और बिना कुछ कहे सब कुछ कह गया !
मैंने तुरंत बोला - भाई अभी तो सफाई की कसम खायी थी , अब रसम कब निभाओगे ,
जवाब आया - पैकेट पास में ही तो पढ़ा है , अब और कितना करवाओगे ?

गज़ब ! अदभुत !

उसके शब्द मैं निःशब्द !

स्वच्छ भारत मिशन - वाह ! अभियान की शुरुवात कुछ वैसी ही थी जैसे सचिन ने अख्तर की पहली ही बॉल पे स्ट्रैट ड्राइव "डाबर लाल दंतमंजन चौका" दे मारा हो ! और वो सचिन की कातिलाना स्ट्रैट ड्राइव पोज़! गज़ब! और लगा मानो जनता ने सचिन सचिन के नारों से मैदान को ऐसा एलेक्ट्रिफाई कर दिया हो कि सैमसंग स्मार्ट फ़ोन भी २ मिनट में फुल चार्ज हो जाये और साथ में २ दिन बैटरी बैक अप वो भी इंटरनेट चालू रहते हुए ! बड़ा भोकाली माहौल था ! कसम कोबी भेड़िया की!

खैर स्वच्छता मिशन एक बहुत ही अच्छी सोच है लेकिन इसे पूरा किसे करना है ? सरकार को ? सफाई कर्मचारियों को ? या स्वच्छता चैलेंज लेके अच्छी सी फोटो ( अच्छी का अभिप्राय कूड़े के साथ वाली फोटो से है) खिचाने वाली हस्तियों को?
इनमे से किसी को भी नहीं ! यह काम हर किसी है ! आपका है! हमारा है ! हम सबका है!
यह मिशन एक सोच को दिल में बसाने से है ! खुद को अनुशाषित बनाने का है ! वक़्त लगेगा लेकिन एक दिन सोच बदलेगी जब सार्वजनिक संपत्ति को लोग अपनी और देश की संपत्ति कहेंगे!
जिस दिन यह सोच आएगी , भारत बदल जायेगा !


वन्दे मातरम!

रोहित जोशी 

Thursday, June 26, 2014

मैं आरक्षण हूँ!

आज फिर से आरक्षण का मुद्दा राजनैतिक गलियारों की सैर करता हुआ सामान्य वर्ग को चिढ़ाते हुए आगे बढ़ गया !
एक सामान्य वर्ग के लिए आरक्षण क्या है यह वही बता सकता है जो 1 अंक से किसी परीक्षा में असफल हो जाता है और दूसरा  उससे 30 अंक कम में सफल ! शिक्षा में और नौकरी में आरक्षण कैसे योग्यता के साथ न्याय कर पाता है ? क्या यह योग्यता के चयन में "आरक्षण की रिश्वत" नहीं है ?
आज जब एक सामान्य वर्ग एक सरकारी नौकरी के लिए आवेदन करता है तो सबसे पहले कुल पदों में सामान्य का प्रतिशत देख कर होसला खो बैठता है ! कल्पना करिये 30 पदों में सामान्य वर्ग के 12 पद ? क्या शेष 18 पदो पे आवेदन करने वाले आरक्षण के आधार पे सामान्य वर्ग से योग्यता में ऊपर हो गए ? ये कैसा सामान अवसर देने का तरीका है? जो जिस पद के योग्य नहीं है वो आरक्षण के आधार पे कैसे उस पद को पाने का अधिकार रखता है ?

आरक्षण दीजिये , उसे दीजिये जो आर्थिक आधार पे पिछड़ा हो, और आरक्षण आर्थिक हो! समाज ,जाति और धर्म पे नहीं ! आर्थिक आरक्षण विशेष वर्ग को आवेदन करने का अवसर दे और सुविधा भी ! लेकिन जब परीक्षण हो तब कसौटी सिर्फ योग्यता हो !

आरक्षण या कहें "सामान्य दर्द" को समझती कुछ पंक्तियाँ-

मैं आरक्षण हूँ!

मैं इस सदी के भारत का भाग्यविधाता हूँ,
कम मेहनत में परिणाम का दाता हूँ ,
मैं सामान्य श्रेणी का "रण" हूँ !  ....... मैं आरक्षण हूँ !

मैं जात-धर्म समाज के खेल का ज्ञानी हूँ,
हर "राजनैतिक" भविष्य का अंतरयामी हूँ,
मैं न दिखने वाले अंतर्विरोध का कारण हूँ !......... मैं आरक्षण हूँ !

मैं कहीं एक "सामान्य" मन की निराशा हूँ,
कहीं "विशेष" के लिए अवसरों का तमाशा हूँ !
मैं अंधरों में रौशनी का भक्षण हूँ ! ..........मैं आरक्षण हूँ !

मैं कभी "भावनाओं" की राजनैतिक प्रयोगशाला हूँ!
कभी "कुछ उम्मीदों" के बीच "जहर" का निवाला हूँ !
मैं भविष्य का सबसे बड़ा ग्रहण हूँ ! .............मैं आरक्षण हूँ !


मैं अवसरों के लिए भटकते हुए "मन" का "रोष" हूँ !
ज्ञानी समाज की नज़रों में आज भी निर्दोष हूँ!
मैं "योग्यता" को खरीदने वाला "अदृश्य धन" हूँ!  ..........मैं आरक्षण हूँ !
मैं बंटते हुए समाज के कण कण में हूँ ! ..........मैं आरक्षण हूँ !

सामान्य वर्ग , एक ऐसा वर्ग जिसे आरक्षण औषधि की आदत पढ़ गयी है ! वास्तव में सामान्य वर्ग कुछ नहीं है ! इसी वर्ग में से कभी जाट आरक्षण कभी गुज्जर आरक्षण तो कभी मराठा आरक्षण और न जाने कितने आरक्षण बन गए ! और धर्म के नाम पे आरक्षण तो हमारे देश के राजनैतिक सेकुलरिज्म की परीक्षा है जिसे देश ने हमेशा प्रथम श्रेणी ससम्मान उत्तीर्ण की है ! जल्द ही वक़्त आएगा जब ये सामान्य वर्ग भी अतिसामान्य वर्ग के अंतर्गत आरक्षण की श्रेणी के लिए संघर्ष करता दिखाई देगा ! आज़ादी के 67 साल बाद भी जिस देश में आरक्षण एक "अवसर" मात्र रह जाये उस देश में  आने वाले समय के पास सामाजिक संघर्ष के अलावा कुछ नहीं दिखाई देता !

अभी इतना ही , लेकिन इतना यकीन से कह सकता हूँ कि आने वाली "सामान्य" पीढ़ी समान अवसर के लिए संघर्ष करेगी और यह संघर्ष बहुत कठिन होगा !

- रोहित "सामान्य" जोशी

Wednesday, June 18, 2014

उस पहाड़ी पर एक, मेरा भी मकान था !

केदारनाथ में आई हिमालयी सुनामी को एक साल पूरा हो गया, आज भी वो भयानक दृश्य आँखों को भिगाते हुए आगे बढ़ लेता है! यह सुनामी अपने साथ बहुत कुछ बहाते हुए आगे बढ़ी थी !  इसी बाढ़ में कहीं किसी का पूरा परिवार था तो कहीं किसी के पूरे परिवार का सहारा !  बाढ़ के एक छोर पे किसी का बचपन बह रहा था तो दूसरे छोर पे किसी परिवार के अपने बच्चों के बचपन के सपने! उसी बाढ़ में किसी की आँखों ने उम्मीदों को छटपटाते हुए देखा तो किसी की आँखों ने अपना सब कुछ गंवाते हुए! उसमे जो भी मिला सब बिखर गया !

इसी बिखराव में एक मन को पढ़ने का प्रयास करती कुछ पंक्तियाँ -

उस पहाड़ी पर एक, मेरा भी मकान था !
ज्यादा कुछ नहीं बस, थोड़ा सा सामान था,
एक परिवार था जिसने उसे घर बनाया था
आवाज़ तो लगायी मैंने, पर सब कुछ सुनसान था,
उस पहाड़ी पर , एक मेरा भी मकान था!

एक आँगन भी था , मेरे बचपन की यादें लिए,
वो मुस्कुराते पल और उनसे हुई मुलाकातें लिए,
आँगन छोटा सही पर बड़ा दिल था उसका,
आज वही आँगन मुझसे ज्यादा परेशान था,
उस पहाड़ी पर एक मेरा भी मकान था !
आवाज़ तो लगायी मैंने पर सब कुछ सुनसान था !

वहां एक नन्ही सी परी की खिलखिलाहट भी थी,
नादान सी बातें और प्यारी मुस्कराहट भी थी ,
पता बताया न किसी ने  कि वो कहाँ छुपी थी,
पता नहीं क्यों , सारा शहर ही मुझसे अनजान था ,
उस पहाड़ी पर एक मेरा भी मकान था !
ज्यादा कुछ नहीं बस,थोड़ा सा सामान था !
उस पहाड़ी पर ,एक मेरा भी मकान था !

केदारनाथ में हुए हादसे में मरने वालों को श्रद्धांजलि!

- रोहित जोशी